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क्या पवन की आंधी में टिक पाएंगे विपक्षी उम्मीदवार ?

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उम्मीदवार प्रोफाइल  दल : भाजपा ग्राम : कालोरी खुर्द  किस पद के लिए दावेदारी : रतलाम जिला पंचायत वार्ड 1 आरती जाट और उनके पति पवन जाट जिस क्षेत्र से अपनी दावेदारी पेश कर रहे है वह इससे पहले भी कई दिग्गज अपनी ताल ठोक चुके है , भाजपा ने इस बार अंडर करेंट को समझते हुए पुराने राजनीतिक घरानों से बाहर निकलते हुए अपेक्षाकृत नए , युवा , किसान नेता को टिकट दिया है पवन जाट राजनितिक गलियारों में भले ही नया नाम हो पर क्षेत्र की जनता के लिए बहुत जाना माना नाम है । कार्य क्षेत्र पवन बहुत सालो से क्षेत्र कि किसान राजनिति में सक्रिय है और बीते कुछ वर्षों से सबसे ताकतवर किसान नेता के रूप उभरे है । हाल फिलहाल वह कभी फसल बीमा के लिए किए गए आंदोलन , तो कभी ओलावृष्टि के मुआवजे के लिए अधिकारियों का घेराव कर दबाव बनाने को लेकर सुर्खियों में रहे , लोगो से पूछने पर पता चला कि मंडी और गेंहू तुलाई केंद्रों पर आने वाली छोटी से लेकर बड़ी समस्या के लिए पवन बस एक फ़ोन कि दूरी पर होते थे ।  पिछले वर्ष आई कोरोना की दूसरी वेव में वैक्सीन और ऑक्सीजन  वितरण को ग्...

क्या है सोशल मीडिया उपयोग करने के नियम ? जाने , social media ka upyog karne k niyam

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 सोशल मीडिया के नियम फेसबुक, व्हाट्सएप्प और इंस्टाग्राम इस इंटरनेट के दौर में हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गया है और इनके उपयोग के कुछ नियम जानना बहुत जरुरी है , तो सोशल मीडिया के उपयोग के कुछ अनकहे नियम इस प्रकार हैं  पहला नियम  देखो भाइयों अगर आपको कोई कन्या उसकी क्यूट DP से बहुत पसंद आ गयी है और आप उस सुंदरी से मित्रता करना चाहते है और इसी उपलक्ष्य में उसे मित्रता याचना (friend request) भेजते हैं और उनके संदेश डिब्बे (inbox) में अपना प्यार भरा संदेश  "Hyy beauty,looking cute in DP"  भेजते हो और वह सुंदर उसे देख कर भी अनदेखा कर दे तो इसका मतलब "साफ़ साफ़" (crystal clear) यह है कि उसे आप की बहुत बहुत बहुत सुंदर DP ज़रा भी पसंद नहीं आयी , विशेष अनुरोध आप सभी भाइयों से बहुत बहुत अनुरोध है की बार बार मैसेज कर के उसके संदेश के डिब्बे में अपने आत्म सम्मान, अंग्रेजी में बोले तो self respect को चादर बनाकर फैलाये नहीं ...... ऐसी स्तिथि में उम्मीद न हारे बल्कि मशहूर शायर "दीवाना मिस्त्री" के शेर का अनुसरण करे     "किसी और खिड़की प...

जानिए कैसे नेता सोशल मीडिया पर आपका उपयोग कर दंगे करा देते हैं ?

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कैसे नेता करते है नफरत फैलाने के लिए आपका उपयोग ? तो भैया आजकल आपका पूरा व्हाट्सएप्प आपके धर्म से विरोध में नारे लगाते हुई भीड़ के वीडियो से भर गया होगा , उन्हें देख देख के आपका खून भी उबल रहा होगा और अब आप उन लोगो के प्रति नफरत से भर गए होंगे और उस वीडियो के साथ 4 गालियां लिख कर आप अपने सारे ग्रुप में पोस्ट भी करने वाले होंगे और साथ में यह भी लिखने वाले होंगे  की "देखो इन लोगो को अगर हमने हमारे नेताजी को वोट नहीं किया तो यह हमें बर्बाद कर देंगे, हमारा जीना दूभर कर देंगे इसलिए इन्हें इस देश से निकाल फेकना ही होगा" पर यह सब मत कीजियेगा , वह मैसेज आगे बढ़ा कर आप कोई देशभक्ति का काम नहीं कर रहे होंगे बल्कि आप उन नेताओं को दंगे फ़ैलाने के उनके मकसद में मदद कर रहे होंगे । केस स्टडी : "हिंदुओ से आजादी" केस अब आप कह रहे होंगे की बेटा तुम ज्ञान तो बहुत बघार लिए , अब बताओ तुम्हारे पास अपनी बात को प्रूव करने का , साबित करने का सबूत क्या है तो आइए चलिए एक केस स्टडी करते है, हाल फिलहाल हुए JNU पर हमले के केस से जुड़ा.. JNU पर हुए इस हमले के विरोध में JNU के पूर्व छ...

कोटा में शिशुओं की मौते : और कितनी लापरवाह होगी राज्य सरकार

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कोटा में नवजात बच्चों की बढ़ती मौते और सोती सरकार राजस्थान के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र में एक स्थान स्थित है नाम है कोटा,  कोटा आईआईटी जेईई परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए देश का सबसे बड़ा एजुकेशन हब है ,कोटा अक्सर छात्रों की आत्महत्या को लेकर खबरों में रहता है , इस बार कोटा फिर खबरों में हैं, इस बार भी मौतों को लेकर परंतु इस बार जान गवाने वाले 19-20 वर्ष के युवा नहीं और न ही फैक्टरियों से चलते कोचिंग इंस्टिट्यूट गुनहगार है , अबकी बार जिन मौतों को लेकर सवाल है वह है चंद दिनों के , चंद महीनो के नवजात शिशुओं की और गुनहगार का ताज अपने सर पर सजाए है कांग्रेस की राज्य सरकार और अस्पताल प्रशासन ।  मृतक बच्चों की संख्या इक्का दुक्का हो तो समझ भी आता है पर जब यही संख्या एक महीने में एक अस्पताल में ( जे के लोन अस्पताल ) सैकड़ा पार कर जाती है तो सामने आता हैं हमारे प्रशासन का , सरकारो का लापरवाही से भरा घिनोना चेहरा | अब आपके मन में सवाल होगा की जब एक महीने से इतनी मौत हो रही थी तो किसी ने उनसे कोई सवाल क्यों नहीं पूछा इसका जवाब है पूछा गया और बकायदा मुख्यमंत...

फैज़ की विवादित ग़ज़ल हम देखेंगे का विश्लेषण और उसका का हिंदी अनुवाद

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फैज़ की विवादित ग़ज़ल हम देखेंगे का विश्लेषण और उसका का हिंदी अनुवाद हम देखेंगे, यह ग़ज़ल पर wikipedia के अनुसार यह ग़ज़ल फैज़ अहमद फैज़ ने पाकिस्तान के तानाशाह ज़िया उल् हक के विरोध में लिखी थी जो उस वक्त काफी विवादों में रही । फैज़ अहमद फैज़ यह ग़ज़ल अगली बार फिर चर्चा में जब आयी जब फैज़ के इंतकाल के बाद इकबाल बानो जो उस समय की जानी मानी ग़ज़ल गायिका थी ने तानाशाह के हुक्म के खिलाफ जाकर काली साड़ी पहन कर फैज़ की इस ग़ज़ल हम देखेंगे को गाया और अपना विरोध दर्ज कराया (तानाशाह ने साड़ी और काले रंग दोनों पर पाबंदी लगा रखी थी क्योंकि उसके अनुसार साड़ी इस्लामिक वस्त्र नहीं हैं और काला रंग विरोध का प्रतीक माना जाता है) इक़बाल बानो भारत में विवादों में क्यों आयी हम देखेंगे ?? हाल ही में हो रहे सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में छात्रों ने हम देखेंगे को कई बार गाया तो कुछ लोगो ने इसके हिन्दू विरोधी माना और इसका विरोध किया , इसकी एक पंक्ति " नाम रहेगा अल्लाह का सब बुत उठवाए जायेंगे" विवाद का मुख्य कारण बनी.. फैज़ अहमद फैज़  की  हम देखेंगे ...

कविता : सरकार से सवाल और उसके जवाब

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मेरे सवालों का जवाब यह नहीं हो सकता !!! रोजगार न होने के मेरे सवाल का जवाब, "2014 के पहले था क्या" नहीं हो सकता, "पाकिस्तान में हैं क्या" नहीं हो सकता , "विदेश में भारत की छवि सुधरी हैं" नहीं हो सकता, "चीन हमसे थर थर काँप रहा हैं" नहीं हो सकता, किसान को उसकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा, मेरे इस सवाल का जवाब, "उनके राज से तो ज्यादा ही हैं" नहीं हो सकता, "तुम देशद्रोही हो" नहीं हो सकता, "हमने फलाना राष्ट्र बनने की तरफ कदम उठाये" नहीं हो सकता, "हम नहीं होंगे तो वो तुम्हें जीने नहीं देंगे" नहीं हो सकता, मेरा सवाल कुछ भी नहीं था , तुम्हारा जवाब कुछ भी नहीं हो सकता । ~सच 🙏🇮🇳पसंद आने पर शेयर जरूर करे 🙏🇮🇳 आपके भी कुछ सवाल है तो बताए जरूर😊

CAB क्या है ? और क्यों हो रहा इसका इतना विरोध ?

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CAB यानी नागरिकता संशोधन विधेयक क्या है? CAB को 1955 में बने नागरिकता कानून में संशोधन (बदलाव) करने के लिए लाया गया, जिसे सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा में पास करवा लिया है क्या संशोधन किया जा रहा है? यह बिल भारत के तीन पडोसी मुस्लिम देशों के गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का रास्ता आसान बनाता है। पहले भारत की नागरिकता पाने के लिए आवेदक को बीते 12 महीने भारत में ही रहना आवश्यक था और बीते 14 साल में से 11 साल भारत में रहना भी आवश्यक था पर अब इस बिल के आ जाने के बाद गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत में 6 साल ही रहने पर भी नागरिकता मिल जाएंगी बशर्ते वह निम्नलिखित देशों और धर्मो से ताल्लुक रखता हो: देश: पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगलादेश धर्म: हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई सरकार के अनुसार ज़रूरत क्यों...? सरकार का कहना है कि मुस्लिम बहुल देशो में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है तो वहाँ से भारत आये शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देना वाजिब है और इससे उन्हें राहत मिलेगी और वह कानूनन यहाँ के नागरिक बन जाएंगे विरोध क्यों? ...

कहानी : अपने अपने सपने

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                         अपने अपने सपने एक बड़ा शहर हैं , छोटी छोटी कई गलियों से बना बड़ा शहर .. इसी शहर की आपस में उलझी गलियां बाहर जाते जाते ऐसे सुलझती हैं कि एक बड़ी चार लेन की सड़क बन जाती हैं  इसी सड़क पर आगे बढ़ने पर सड़क के किनारे एक छोटा सा घर आता हैं , घर प्रकाश का.... रात को सड़क पर आती जाती गाड़ियों की हलकी पीली रोशनी प्रकाश के घर पर पड़ती हैं तो सड़क से गुजरने वालों के लिए चंद पलों के लिए वह अस्तित्व में आता हैं और फिर वापस डूब जाता हैं अपने पुराने अंधियारे में... वैसे घर क्या कहे , उबड़ खाबड़ सी बनी दीवारे उस पर जबरदस्ती टांगे से गए टीन के चद्दर, बाहर आँगन में टँगा एक बंद बल्ब और दो सपने... एक प्रकाश का एक प्रकाश के बेटे राहुल का प्रकाश का सपना की पिछली बारिश में जो टीन की छत डाली थी उसके लिए जो पैसे उधार लिए थे वह चुकता कर दे ताकि सेठ जी बार बार लड़के को भेज कर उन्हें जलील न करे राहुल का सपना थोड़ा बड़ा था की उसने पाठ्यपुस्तक में जिन अब्दुल कलाम की कहानी पढ़ी थी उनके जैसा साइंटिस्ट बनने का सपना ...

अपने अस्तित्व के लिए झुझता संविधान

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        आज के समय में संविधान का महत्त्व नमस्कार, आप सभी को संविधान दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाये आज के दिन हमने खुद को यह संविधान दिया था , आजादी के इतने साल बाद भी सवाल यह है कि हमने और हमारे नेताओं ने संविधान को कितना सम्मान दिया ? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह संविधान हम पर थोपा नहीं गया है , संविधान की उद्देशिका में साफ़ साफ़ लिखा है कि हम भारत के लोग खुद को यह संविधान देते है यानी हमने अपनी मर्जी से इस संविधान को चुना है अपने लिए । भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है इसमें हर बात काँच की तरह साफ़ करने की कोशिश की गयी है जैसे किस पद पर कोन व्यक्ति बैठेगा , उसका चुनाव कोन करेगा , उसके कार्य क्या होंगे और उसकी योग्यता क्या होगी पर इतना सब होने के बाद भी संविधान में कुछ जगह छूट जाती है पद पर बैठे आदमी के विवेक के लिए जैसे मसलन आजादी के बाद से राज्यपाल के पद का कई बार अपने फायदे के लिए दुरूपयोग किया गया... संविधान निर्माण समिति ने संविधान के संसोधन के लिए भी जगह रखी ताकि संविधान वक्त की जरूरतों के हिसाब से खुद ...

JNU के जिस दृष्टि बाधित शशि भूषण पांडेय पर दिल्ली पुलिस ने लाठी बरसायी वह है BJP जिला अध्यक्ष का बेटा, जाने क्या कहना है पिता का ??

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यह रहा उनके पिता के फेसबुक प्रोफाइल का स्क्रीन शॉट आप देख सकते है क्या कहना है उनके पिता का इस बारे में , उनकी फेसबुक प्रोफाइल देखने के लिए फेसबुक पर उन्हें सर्च भी कर सकते है या Anand pandey facebook  पर जाकर देख सकते है

JNU के छात्रों पर लगते आरोप किस हद तक सही है ??

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क्या JNU वाले देशद्रोही है ? रुकिए जनाब  जरा ठहरिये  JNU  वाले देश द्रोही है........ JNU में सबके पास iphone है...... JNU में जितने भी लोग पढ़ रहे है वह बूढ़े है..... JNU में हॉस्टल fee सिर्फ 300 रूपये हुई है..... JNU नशेड़ियों का अड्डा हो गया है...... JNU में रोज इतनी हजार बियर बोतल रोज निकलती है.... और भी बहुत कुछ आपको मीडिया और ज्ञान पाने के सबसे भरोसेमंद जरिये व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी से मिल रही होगी । पर अब आते है आंकड़ो पर JNU में रहने वाले छात्रों को रहने खाने की फीस (हॉस्टल + सर्विस चार्ज + मेस फीस) अब 60000 रूपये हो गयी है  और गरीबी रेखा से नीचे वाले छात्रों के लिए 47000 हो गयी है  *इसमें कॉलेज की कोई भी फीस नहीं जोड़ी गयी है अब आते है iphone वाले पॉइंट पर आंकड़े बताते है की JNU में 40 प्रतिशत छात्र ऐसे है जिनके परिवार की मासिक आय 12000 है और 27 प्रतिशत छात्र ऐसे है जिनकी हालात अत्यंत ख़राब है और उनकी मासिक आय 6000 है यानि कुल  67 प्रतिशत छात्र ऐसे जो वहाँ पढ़ने के लिए छात्रवर्ती पर निर्भर है अब बाकि के 33 प्रतिशत छात...

मशहूर लेखकों द्वारा लिखी गयी कुछ शानदार SAD HINDI POEM

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SAD HINDI POEM for youths by great poets आज कल के  facebook और  whatsapp के जमाने में लोग अपनी feelings को status और caption के जरिये व्यतीत करते है , इसलिए आज कल के युवा लोग भारत के पुराने Great कवियों की रचनाओं को अपनी भावनाओं को दिखाने का जरिया बनाते है , हमने आपके के लिए कुछ ऐसी कविताएं (SAD POEM) संग्रह की है 1 ओ गगन के जगमगाते दीप! -  हरिवंश राय बच्चन जी दीन जीवन के दुलारे खो गये जो स्वप्न सारे, ला सकोगे क्या उन्हें फिर खोज हृदय समीप? ओ गगन के जगमगाते दीप! यदि न मेरे स्वप्न पाते, क्यों नहीं तुम खोज लाते वह घड़ी चिर शान्ति दे जो पहुँच प्राण समीप? ओ गगन के जगमगाते दीप! यदि न वह भी मिल रही है, है कठिन पाना-सही है, नींद को ही क्यों न लाते खींच पलक समीप? ओ गगन के जगमगाते दीप 2. मैंने गाकर दुख अपनाए! - हरिवंश राय बच्चन कभी न मेरे मन को भाया, जब दुख मेरे ऊपर आया, मेरा दुख अपने ऊपर ले कोई मुझे बचाए! मैंने गाकर दुख अपनाए! ...

एम्बुलेंस की मोहताज हो गयी आइंस्टीन को चुनौती देने वाले गणितज्ञ की देह ।

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एम्बुलेंस की मोहताज हो गयी आइंस्टीन को चुनौती देने वाले गणितज्ञ की देह       Pic source : the quint भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और आइंस्टीन के सिद्धान्तों को चुनौती देकर प्रसिद्ध हुए डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह जी का देहांत पटना के पीएमसीएच हुआ , वह 77 साल के थे और करीब 40 साल से सिजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित थे । उनकी प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने भी ट्वीट करके उनके निधन पर शोक जताया है  राष्ट्रपति जी का ट्वीट प्रधानमंत्री जी का ट्वीट अब आप इस चित्र को देखिये  इस चित्र में जिस व्यक्ति की देह स्ट्रेचर पर लेटी है डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह जी की है और बगल में जो सज्जन खड़े है वह इनके परिजन है और उनका कहना है कि अस्पताल की तरफ से उन्हें कोई एम्बुलेंस मुहैया नहीं करायी गयी और वह 2 घंटे खुले में वशिष्ठ जी की देह को लेकर एम्बुलेंस आने का इंतजार करते रहे और अंत में स्वयं की व्यवस्था करके शव को घर ले गए । अब...

आखिर क्यों है रविवार हमसे नाराज ?

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  रविवार आपसे कुछ कहना चाहता है ! Sunday wants to say something to you!           नमस्कार दोस्तों, मैं इतवार हूँ , आप लोग मुझे Sunday के नाम से भी जानते होंगे.. सन 1843 तक बाकि के 6 दिनों जैसा आम (फल वाला नहीं, केजरीवाल वाला) सा दिन था परंतु इसके बाद मेरी जिंदगी ही बदल गयी , अंग्रेजो ने कूटनीति से मुझे अवकाश घोषित करके मुझमे और मेरे बाकि के 6 भाइयों में फूट डाल दी , कुछ दिन हमारे झगडे चले पर अब सुलह हो गयी है क्योंकि अब हम इंसान थोड़ी है जो अंग्रेजो के गाड़े खूंटो के लिए  अभी तक लड़ते रहे, फिर क्या था मैं एका एक सबका चहेता बन गया... पहले जब मेरे आने से किसी को फर्क नहीं पड़ता था अब सब मेरा ही इंतजार करने लगे... मेरे आने से सबसे ज्यादा खुश बच्चे होते है, क्योंकि उन्हें न तो सुबह जल्दी उठ कर स्कूल जाना होता है और ऊपर से खेलने के लिए ढेर सारा वक्त मिल जाता है वह अलग ,कामकाजी पुरुष आराम से उठते है और फिर दिनभर ऐसे सुस्ताते रहते है जैसे उन्हें राहुल गाँधी जी जैसा जबरजस्ती संसद में बैठना पड़ रहा हो, प...

प्रदूषण सब ने फैलाया ,तो जिम्मेदार अकेला किसान क्यों ?

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                 कटघरे में किसान अकेला क्यों ?? मीडिया , सरकार, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली की आम जनता पड़ोसी राज्यो के किसानों पर पराली जलाने को लेकर कटघरे में खड़ा कर दिया है और दूसरे कारणों का कही से कही तक कोई जिक्र ही नहीं हो रहा है । तो क्या सच में इस प्रदुषण को लेकर किसान इतना जिम्मेदार है ? क्या सच में दिल्ली में फैले प्रदूषण को लेकर वहाँ की आम जनता , सरकार और पावर प्लांट बेकसूर है ? सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 35 प्रतिशत दिल्ली का प्रदूषण किसानों के द्वारा जलायी गयी पराली से होता है , अगर इस आंकड़े को एक पल के लिए सही भी मान ले तो बाकि के 65 प्रतिशत का क्या ? अगर सरकार यह बता सकती है कि किसानों ने कितना प्रदूषण फैलाया तो उसे बाकि के 65 प्रतिशत के गुनाहगारों के बारे में भी पता ही होगा , पराली जलाने वाले किसानों पर तो सरकार जुर्माना लगा रही है पर लाखों AC और करोड़ो वाहनों का सुख भोगने वाली दिल्ली की आम जनता का क्या.... ? आंकड़ो के मुताबिक दिल्ली में करीब 1 करोड़ के अधिक वाहन है और पिछले साल सिर्फ और ...

इश्क़ इन भोपाल : A Bhopali love story

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BHOPALI LOVE STORY                                                                                 इश्क़ इन भोपाल                        शाम का वक्त था,  रोड के बगल में दूर तलक दिखती झील और उसमें डूबते सूर्य से पानी में तैरती लालिमा माहौल में एक अजीब सी मिठास घोल रही थी, किनारे लगी राजा भोज की प्रतिमा भी आज जरा सा ज्यादा मुस्कुरा रही थी इसी बीच इसी सड़क एक बाइक पर एंट्री होती है हमारे हीरो की , नाम "राहुल ठाकुर" उम्र यही कोई 20-21 के आस पास, गेहुआ रंग औसत कद काठी , चमड़े का जैकेट डालें किसी Normal college going student  जैसा हुलिया,  राहुल एक हाथ से बाइक का handle सँभालते तो एक हाथ से अपने बालों को संवारते अपनी ही धुन में सरपट चला जा रहा था , वह कभी एक तरफ दिनभर जलते जलाते हुए रवि को पानी की शी...

क्यों आपकी और हमारी वजह से डूब रही पंचायते, जानें ?

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ग्राम पंचायतें : भारतीय राजनितिक तंत्र का डूबता जहाज गाँधी जी ने आजादी के वक्त ग्राम पंचायतों को भारत के तंत्र की नींव बनाने की वकालत की थी परंतु तब उनके सुझावों पर अमल नहीं किया गया पर जब आगे जाकर जब पंचायत का महत्त्व समझ आया तो इसे 1992 में संविधान में जोड़ लिया गया... आज का सवाल यही है कि क्या ग्राम पंचायतें अपने उद्देश्य में सफल हो पायी ??? और अगर आप भारत के गाँवों में जरा सा झाँक के देखोगे तो गांव आपको खुद चीखते हुए जवाब "ना" में देंगे .... आज ग्राम पंचायतें गबन करते पैसे हजम करने का अड्डा बन चुकी है..... नई सोच के साथ आगे बढ़ना तो दूर की बात इतने वर्षों में यह गांवों में पानी और सड़क जैसी मुलभुत सुविधाएं भी पूरी तरह से नहीं पहुँचा पायी..... आइये पहले ग्राम पंचायत के बारे में जानते है उसके बाद इस बारे में और बात करेंगे READ MORE :  क्या सच में इस प्रदुषण को लेकर किसान इतना जिम्मेदार है ? राज्य सरकारों के बावजूद ग्राम पंचायतों की जरुरत क्यों जैसा की आप सब जानते है कि भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और लोकतांत्रिक देश होने के कारण यहाँ की सारी शक...