संदेश

किस्से लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कविता : सरकार से सवाल और उसके जवाब

चित्र
मेरे सवालों का जवाब यह नहीं हो सकता !!! रोजगार न होने के मेरे सवाल का जवाब, "2014 के पहले था क्या" नहीं हो सकता, "पाकिस्तान में हैं क्या" नहीं हो सकता , "विदेश में भारत की छवि सुधरी हैं" नहीं हो सकता, "चीन हमसे थर थर काँप रहा हैं" नहीं हो सकता, किसान को उसकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा, मेरे इस सवाल का जवाब, "उनके राज से तो ज्यादा ही हैं" नहीं हो सकता, "तुम देशद्रोही हो" नहीं हो सकता, "हमने फलाना राष्ट्र बनने की तरफ कदम उठाये" नहीं हो सकता, "हम नहीं होंगे तो वो तुम्हें जीने नहीं देंगे" नहीं हो सकता, मेरा सवाल कुछ भी नहीं था , तुम्हारा जवाब कुछ भी नहीं हो सकता । ~सच 🙏🇮🇳पसंद आने पर शेयर जरूर करे 🙏🇮🇳 आपके भी कुछ सवाल है तो बताए जरूर😊

कहानी : अपने अपने सपने

चित्र
                         अपने अपने सपने एक बड़ा शहर हैं , छोटी छोटी कई गलियों से बना बड़ा शहर .. इसी शहर की आपस में उलझी गलियां बाहर जाते जाते ऐसे सुलझती हैं कि एक बड़ी चार लेन की सड़क बन जाती हैं  इसी सड़क पर आगे बढ़ने पर सड़क के किनारे एक छोटा सा घर आता हैं , घर प्रकाश का.... रात को सड़क पर आती जाती गाड़ियों की हलकी पीली रोशनी प्रकाश के घर पर पड़ती हैं तो सड़क से गुजरने वालों के लिए चंद पलों के लिए वह अस्तित्व में आता हैं और फिर वापस डूब जाता हैं अपने पुराने अंधियारे में... वैसे घर क्या कहे , उबड़ खाबड़ सी बनी दीवारे उस पर जबरदस्ती टांगे से गए टीन के चद्दर, बाहर आँगन में टँगा एक बंद बल्ब और दो सपने... एक प्रकाश का एक प्रकाश के बेटे राहुल का प्रकाश का सपना की पिछली बारिश में जो टीन की छत डाली थी उसके लिए जो पैसे उधार लिए थे वह चुकता कर दे ताकि सेठ जी बार बार लड़के को भेज कर उन्हें जलील न करे राहुल का सपना थोड़ा बड़ा था की उसने पाठ्यपुस्तक में जिन अब्दुल कलाम की कहानी पढ़ी थी उनके जैसा साइंटिस्ट बनने का सपना ...

आखिर क्यों है रविवार हमसे नाराज ?

चित्र
  रविवार आपसे कुछ कहना चाहता है ! Sunday wants to say something to you!           नमस्कार दोस्तों, मैं इतवार हूँ , आप लोग मुझे Sunday के नाम से भी जानते होंगे.. सन 1843 तक बाकि के 6 दिनों जैसा आम (फल वाला नहीं, केजरीवाल वाला) सा दिन था परंतु इसके बाद मेरी जिंदगी ही बदल गयी , अंग्रेजो ने कूटनीति से मुझे अवकाश घोषित करके मुझमे और मेरे बाकि के 6 भाइयों में फूट डाल दी , कुछ दिन हमारे झगडे चले पर अब सुलह हो गयी है क्योंकि अब हम इंसान थोड़ी है जो अंग्रेजो के गाड़े खूंटो के लिए  अभी तक लड़ते रहे, फिर क्या था मैं एका एक सबका चहेता बन गया... पहले जब मेरे आने से किसी को फर्क नहीं पड़ता था अब सब मेरा ही इंतजार करने लगे... मेरे आने से सबसे ज्यादा खुश बच्चे होते है, क्योंकि उन्हें न तो सुबह जल्दी उठ कर स्कूल जाना होता है और ऊपर से खेलने के लिए ढेर सारा वक्त मिल जाता है वह अलग ,कामकाजी पुरुष आराम से उठते है और फिर दिनभर ऐसे सुस्ताते रहते है जैसे उन्हें राहुल गाँधी जी जैसा जबरजस्ती संसद में बैठना पड़ रहा हो, प...

इश्क़ इन भोपाल : A Bhopali love story

चित्र
BHOPALI LOVE STORY                                                                                 इश्क़ इन भोपाल                        शाम का वक्त था,  रोड के बगल में दूर तलक दिखती झील और उसमें डूबते सूर्य से पानी में तैरती लालिमा माहौल में एक अजीब सी मिठास घोल रही थी, किनारे लगी राजा भोज की प्रतिमा भी आज जरा सा ज्यादा मुस्कुरा रही थी इसी बीच इसी सड़क एक बाइक पर एंट्री होती है हमारे हीरो की , नाम "राहुल ठाकुर" उम्र यही कोई 20-21 के आस पास, गेहुआ रंग औसत कद काठी , चमड़े का जैकेट डालें किसी Normal college going student  जैसा हुलिया,  राहुल एक हाथ से बाइक का handle सँभालते तो एक हाथ से अपने बालों को संवारते अपनी ही धुन में सरपट चला जा रहा था , वह कभी एक तरफ दिनभर जलते जलाते हुए रवि को पानी की शी...