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क्यों आपकी और हमारी वजह से डूब रही पंचायते, जानें ?

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ग्राम पंचायतें : भारतीय राजनितिक तंत्र का डूबता जहाज गाँधी जी ने आजादी के वक्त ग्राम पंचायतों को भारत के तंत्र की नींव बनाने की वकालत की थी परंतु तब उनके सुझावों पर अमल नहीं किया गया पर जब आगे जाकर जब पंचायत का महत्त्व समझ आया तो इसे 1992 में संविधान में जोड़ लिया गया... आज का सवाल यही है कि क्या ग्राम पंचायतें अपने उद्देश्य में सफल हो पायी ??? और अगर आप भारत के गाँवों में जरा सा झाँक के देखोगे तो गांव आपको खुद चीखते हुए जवाब "ना" में देंगे .... आज ग्राम पंचायतें गबन करते पैसे हजम करने का अड्डा बन चुकी है..... नई सोच के साथ आगे बढ़ना तो दूर की बात इतने वर्षों में यह गांवों में पानी और सड़क जैसी मुलभुत सुविधाएं भी पूरी तरह से नहीं पहुँचा पायी..... आइये पहले ग्राम पंचायत के बारे में जानते है उसके बाद इस बारे में और बात करेंगे READ MORE :  क्या सच में इस प्रदुषण को लेकर किसान इतना जिम्मेदार है ? राज्य सरकारों के बावजूद ग्राम पंचायतों की जरुरत क्यों जैसा की आप सब जानते है कि भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और लोकतांत्रिक देश होने के कारण यहाँ की सारी शक...

हिंदी कहानी : एक पुराना ख्वाब

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एक पुराना ख्वाब ‌यह शर्मा परिवार के यहां की एक सामान्य सी सुबह थी, बस इस बार छुट्टियों में घर आए आदित्य के कारण थोड़ी सी चहल-पहल बढ़ गई थी | आदित्य अपनी मां के साथ मिलकर घर में पड़े पुराने सामान की छटाई मैं मदद कर रहा था ताकि काम का  सामान रखकर बाकी का सामान कबाड़ वाले को तोला जा सके, तभी उसकी नजर एक पुरानी नटराज के geometry box पर पड़ी उसने धीरे से मां की नजरों से बचाते हुए उस geometry box को अपने जेब में डाल लिया काम से फुर्सत पाकर आदित्य ने जैसे ही उस बॉक्स को खोला उसने पाया कि उस डिब्बे के अंदर एक पॉलिथीन के अंदर लपेटा हुआ सोने का तमगा रखा हुआ था, जिस पर अंग्रेजी में अंकित था 'नेशनल जूनियर बॉक्सिंग चैंपियन' , उस मैडल की कहीं-कहीं से पॉलिश चुकी थी | उस मैडल को देखते ही आदित्य के सामने उसके बचपन के कई दृश्य जीवंत हो गए हो गए कि कैसे उसने एक सपना देखा था नेशनल चैंपियनशिप में अपने राज्य के लिए एक मेडल जीत के लाने का, कैसे उसने लगातार तीन साल तक कड़े अभ्यास के बाद नेशनल चैंपियनशिप में जगह बनाई थी और स्वर्ण पदक जीता था | वापस अपने शहर आने पर शहर के एकमात्र राष्ट्रीय स...