प्रस्तावना आज कल शहरो में फेमिनिज्म की आवाज बड़ी तेजी स्वर पकड़ रही है, सोशल मीडिया साइट्स पर मुहिमे चलायी जा रही है , महिलाएं खासकर युवा यानि हमारी हमउम्र ,महिलाओ के मुद्दों पर खुल कर सामने आ रही है फिर चाहे वह मुद्दा बीते दशक से उठ रहा समान वेतमान का हो या फिर मासिक धर्म और सेनेटरी पैड्स के उपयोग जैसे मुद्दा | जिसका उल्लेख भी आज से कुछ वर्ष पहले तक किया जाना अपवित्र माना जाता था । गाँव की नारी,सब पर भारी यह तो हो गयी शहरों की बात अब बात करते है भारतीय समाज के उस तबके की जिसकी व्याख्या अंग्रेजी के शब्द "underated" से की जा सकती है वह है "ग्रामीण महिला" जिसका उल्लेख न तो रोज रोज अखबारों में होता है, न ही यह तबका टीवी पर खिड़कियों में बैठा बहस करता दिखेगा पर है तो यह भारतीय समाज का सबसे अहम तबका जो इस आधुनिकता के दौर में जहाँ पश्चिम की तरफ से चल रही हवा हमारे रहन सहन में मिलावट कर रही है उसी दौर में ग्रामीण महिलाएं आज भी नैतिकता और सरलता का झंडा उठाए झूझ रही है और जिस बराबरी के हक़ की आवाज को आज लोग फेमिनिज्म की उपमा दे रहे है यह महिलाएं सदियों...
ग्राम पंचायतें : भारतीय राजनितिक तंत्र का डूबता जहाज गाँधी जी ने आजादी के वक्त ग्राम पंचायतों को भारत के तंत्र की नींव बनाने की वकालत की थी परंतु तब उनके सुझावों पर अमल नहीं किया गया पर जब आगे जाकर जब पंचायत का महत्त्व समझ आया तो इसे 1992 में संविधान में जोड़ लिया गया... आज का सवाल यही है कि क्या ग्राम पंचायतें अपने उद्देश्य में सफल हो पायी ??? और अगर आप भारत के गाँवों में जरा सा झाँक के देखोगे तो गांव आपको खुद चीखते हुए जवाब "ना" में देंगे .... आज ग्राम पंचायतें गबन करते पैसे हजम करने का अड्डा बन चुकी है..... नई सोच के साथ आगे बढ़ना तो दूर की बात इतने वर्षों में यह गांवों में पानी और सड़क जैसी मुलभुत सुविधाएं भी पूरी तरह से नहीं पहुँचा पायी..... आइये पहले ग्राम पंचायत के बारे में जानते है उसके बाद इस बारे में और बात करेंगे READ MORE : क्या सच में इस प्रदुषण को लेकर किसान इतना जिम्मेदार है ? राज्य सरकारों के बावजूद ग्राम पंचायतों की जरुरत क्यों जैसा की आप सब जानते है कि भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और लोकतांत्रिक देश होने के कारण यहाँ की सारी शक...
उम्मीदवार प्रोफाइल दल : भाजपा ग्राम : कालोरी खुर्द किस पद के लिए दावेदारी : रतलाम जिला पंचायत वार्ड 1 आरती जाट और उनके पति पवन जाट जिस क्षेत्र से अपनी दावेदारी पेश कर रहे है वह इससे पहले भी कई दिग्गज अपनी ताल ठोक चुके है , भाजपा ने इस बार अंडर करेंट को समझते हुए पुराने राजनीतिक घरानों से बाहर निकलते हुए अपेक्षाकृत नए , युवा , किसान नेता को टिकट दिया है पवन जाट राजनितिक गलियारों में भले ही नया नाम हो पर क्षेत्र की जनता के लिए बहुत जाना माना नाम है । कार्य क्षेत्र पवन बहुत सालो से क्षेत्र कि किसान राजनिति में सक्रिय है और बीते कुछ वर्षों से सबसे ताकतवर किसान नेता के रूप उभरे है । हाल फिलहाल वह कभी फसल बीमा के लिए किए गए आंदोलन , तो कभी ओलावृष्टि के मुआवजे के लिए अधिकारियों का घेराव कर दबाव बनाने को लेकर सुर्खियों में रहे , लोगो से पूछने पर पता चला कि मंडी और गेंहू तुलाई केंद्रों पर आने वाली छोटी से लेकर बड़ी समस्या के लिए पवन बस एक फ़ोन कि दूरी पर होते थे । पिछले वर्ष आई कोरोना की दूसरी वेव में वैक्सीन और ऑक्सीजन वितरण को ग्...
"कागज की नाव और बचपन" छोटा था तब मैं कागज की नाव में अपना बचपन बिठा कर बारिश के बहते पानी में छोड़ देता था, समझ थी नहीं... तो नाव मजबूत बनती नहीं थी , कुछ दूर जाकर डूब जाती थी...बचपन पानी में लुढक जाता था मैं भी मजे से उसी पानी में मस्ती करते हुए अपना बचपन वापस उठा लाता था और फिर इंतजार करता था अगली बारिश का... हर बार यही होता.... पर धीरे धीरे मैं बड़ा हो गया मुझे नाव बनाना अच्छे से आ गयी.. एक दिन फिर बारिश आयी मैंने नाव बनायी और फिर से बचपन बिठा के छोड़ दिया पानी में पर यह क्या अबकी बार नाव डूबी ही नहीं वह तो सरपट आगे निकल गयी थी ... पानी के तेज़ बहाव के साथ ... अब वह नाव तो निकल गयी.. बचपन भी निकल गया... पीछे रह गया मैं अकेला... अभी भी वही हूँ, सोच रहा हूँ की .......क्या गलती कर दी थी बड़ा होकर.... पर जो भी है अब है .... वैसे आपको पहली बारिश मुबारक🙂 -शुभम जाट
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