ग्राम पंचायतें : भारतीय राजनितिक तंत्र का डूबता जहाज गाँधी जी ने आजादी के वक्त ग्राम पंचायतों को भारत के तंत्र की नींव बनाने की वकालत की थी परंतु तब उनके सुझावों पर अमल नहीं किया गया पर जब आगे जाकर जब पंचायत का महत्त्व समझ आया तो इसे 1992 में संविधान में जोड़ लिया गया... आज का सवाल यही है कि क्या ग्राम पंचायतें अपने उद्देश्य में सफल हो पायी ??? और अगर आप भारत के गाँवों में जरा सा झाँक के देखोगे तो गांव आपको खुद चीखते हुए जवाब "ना" में देंगे .... आज ग्राम पंचायतें गबन करते पैसे हजम करने का अड्डा बन चुकी है..... नई सोच के साथ आगे बढ़ना तो दूर की बात इतने वर्षों में यह गांवों में पानी और सड़क जैसी मुलभुत सुविधाएं भी पूरी तरह से नहीं पहुँचा पायी..... आइये पहले ग्राम पंचायत के बारे में जानते है उसके बाद इस बारे में और बात करेंगे READ MORE : क्या सच में इस प्रदुषण को लेकर किसान इतना जिम्मेदार है ? राज्य सरकारों के बावजूद ग्राम पंचायतों की जरुरत क्यों जैसा की आप सब जानते है कि भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और लोकतांत्रिक देश होने के कारण यहाँ की सारी शक...
सोशल मीडिया के नियम फेसबुक, व्हाट्सएप्प और इंस्टाग्राम इस इंटरनेट के दौर में हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गया है और इनके उपयोग के कुछ नियम जानना बहुत जरुरी है , तो सोशल मीडिया के उपयोग के कुछ अनकहे नियम इस प्रकार हैं पहला नियम देखो भाइयों अगर आपको कोई कन्या उसकी क्यूट DP से बहुत पसंद आ गयी है और आप उस सुंदरी से मित्रता करना चाहते है और इसी उपलक्ष्य में उसे मित्रता याचना (friend request) भेजते हैं और उनके संदेश डिब्बे (inbox) में अपना प्यार भरा संदेश "Hyy beauty,looking cute in DP" भेजते हो और वह सुंदर उसे देख कर भी अनदेखा कर दे तो इसका मतलब "साफ़ साफ़" (crystal clear) यह है कि उसे आप की बहुत बहुत बहुत सुंदर DP ज़रा भी पसंद नहीं आयी , विशेष अनुरोध आप सभी भाइयों से बहुत बहुत अनुरोध है की बार बार मैसेज कर के उसके संदेश के डिब्बे में अपने आत्म सम्मान, अंग्रेजी में बोले तो self respect को चादर बनाकर फैलाये नहीं ...... ऐसी स्तिथि में उम्मीद न हारे बल्कि मशहूर शायर "दीवाना मिस्त्री" के शेर का अनुसरण करे "किसी और खिड़की प...
कैसे नेता करते है नफरत फैलाने के लिए आपका उपयोग ? तो भैया आजकल आपका पूरा व्हाट्सएप्प आपके धर्म से विरोध में नारे लगाते हुई भीड़ के वीडियो से भर गया होगा , उन्हें देख देख के आपका खून भी उबल रहा होगा और अब आप उन लोगो के प्रति नफरत से भर गए होंगे और उस वीडियो के साथ 4 गालियां लिख कर आप अपने सारे ग्रुप में पोस्ट भी करने वाले होंगे और साथ में यह भी लिखने वाले होंगे की "देखो इन लोगो को अगर हमने हमारे नेताजी को वोट नहीं किया तो यह हमें बर्बाद कर देंगे, हमारा जीना दूभर कर देंगे इसलिए इन्हें इस देश से निकाल फेकना ही होगा" पर यह सब मत कीजियेगा , वह मैसेज आगे बढ़ा कर आप कोई देशभक्ति का काम नहीं कर रहे होंगे बल्कि आप उन नेताओं को दंगे फ़ैलाने के उनके मकसद में मदद कर रहे होंगे । केस स्टडी : "हिंदुओ से आजादी" केस अब आप कह रहे होंगे की बेटा तुम ज्ञान तो बहुत बघार लिए , अब बताओ तुम्हारे पास अपनी बात को प्रूव करने का , साबित करने का सबूत क्या है तो आइए चलिए एक केस स्टडी करते है, हाल फिलहाल हुए JNU पर हमले के केस से जुड़ा.. JNU पर हुए इस हमले के विरोध में JNU के पूर्व छ...
प्रस्तावना आज कल शहरो में फेमिनिज्म की आवाज बड़ी तेजी स्वर पकड़ रही है, सोशल मीडिया साइट्स पर मुहिमे चलायी जा रही है , महिलाएं खासकर युवा यानि हमारी हमउम्र ,महिलाओ के मुद्दों पर खुल कर सामने आ रही है फिर चाहे वह मुद्दा बीते दशक से उठ रहा समान वेतमान का हो या फिर मासिक धर्म और सेनेटरी पैड्स के उपयोग जैसे मुद्दा | जिसका उल्लेख भी आज से कुछ वर्ष पहले तक किया जाना अपवित्र माना जाता था । गाँव की नारी,सब पर भारी यह तो हो गयी शहरों की बात अब बात करते है भारतीय समाज के उस तबके की जिसकी व्याख्या अंग्रेजी के शब्द "underated" से की जा सकती है वह है "ग्रामीण महिला" जिसका उल्लेख न तो रोज रोज अखबारों में होता है, न ही यह तबका टीवी पर खिड़कियों में बैठा बहस करता दिखेगा पर है तो यह भारतीय समाज का सबसे अहम तबका जो इस आधुनिकता के दौर में जहाँ पश्चिम की तरफ से चल रही हवा हमारे रहन सहन में मिलावट कर रही है उसी दौर में ग्रामीण महिलाएं आज भी नैतिकता और सरलता का झंडा उठाए झूझ रही है और जिस बराबरी के हक़ की आवाज को आज लोग फेमिनिज्म की उपमा दे रहे है यह महिलाएं सदियों...
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