संदेश

अपने अस्तित्व के लिए झुझता संविधान

चित्र
        आज के समय में संविधान का महत्त्व नमस्कार, आप सभी को संविधान दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाये आज के दिन हमने खुद को यह संविधान दिया था , आजादी के इतने साल बाद भी सवाल यह है कि हमने और हमारे नेताओं ने संविधान को कितना सम्मान दिया ? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह संविधान हम पर थोपा नहीं गया है , संविधान की उद्देशिका में साफ़ साफ़ लिखा है कि हम भारत के लोग खुद को यह संविधान देते है यानी हमने अपनी मर्जी से इस संविधान को चुना है अपने लिए । भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है इसमें हर बात काँच की तरह साफ़ करने की कोशिश की गयी है जैसे किस पद पर कोन व्यक्ति बैठेगा , उसका चुनाव कोन करेगा , उसके कार्य क्या होंगे और उसकी योग्यता क्या होगी पर इतना सब होने के बाद भी संविधान में कुछ जगह छूट जाती है पद पर बैठे आदमी के विवेक के लिए जैसे मसलन आजादी के बाद से राज्यपाल के पद का कई बार अपने फायदे के लिए दुरूपयोग किया गया... संविधान निर्माण समिति ने संविधान के संसोधन के लिए भी जगह रखी ताकि संविधान वक्त की जरूरतों के हिसाब से खुद ...

JNU के जिस दृष्टि बाधित शशि भूषण पांडेय पर दिल्ली पुलिस ने लाठी बरसायी वह है BJP जिला अध्यक्ष का बेटा, जाने क्या कहना है पिता का ??

चित्र
यह रहा उनके पिता के फेसबुक प्रोफाइल का स्क्रीन शॉट आप देख सकते है क्या कहना है उनके पिता का इस बारे में , उनकी फेसबुक प्रोफाइल देखने के लिए फेसबुक पर उन्हें सर्च भी कर सकते है या Anand pandey facebook  पर जाकर देख सकते है

JNU के छात्रों पर लगते आरोप किस हद तक सही है ??

चित्र
क्या JNU वाले देशद्रोही है ? रुकिए जनाब  जरा ठहरिये  JNU  वाले देश द्रोही है........ JNU में सबके पास iphone है...... JNU में जितने भी लोग पढ़ रहे है वह बूढ़े है..... JNU में हॉस्टल fee सिर्फ 300 रूपये हुई है..... JNU नशेड़ियों का अड्डा हो गया है...... JNU में रोज इतनी हजार बियर बोतल रोज निकलती है.... और भी बहुत कुछ आपको मीडिया और ज्ञान पाने के सबसे भरोसेमंद जरिये व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी से मिल रही होगी । पर अब आते है आंकड़ो पर JNU में रहने वाले छात्रों को रहने खाने की फीस (हॉस्टल + सर्विस चार्ज + मेस फीस) अब 60000 रूपये हो गयी है  और गरीबी रेखा से नीचे वाले छात्रों के लिए 47000 हो गयी है  *इसमें कॉलेज की कोई भी फीस नहीं जोड़ी गयी है अब आते है iphone वाले पॉइंट पर आंकड़े बताते है की JNU में 40 प्रतिशत छात्र ऐसे है जिनके परिवार की मासिक आय 12000 है और 27 प्रतिशत छात्र ऐसे है जिनकी हालात अत्यंत ख़राब है और उनकी मासिक आय 6000 है यानि कुल  67 प्रतिशत छात्र ऐसे जो वहाँ पढ़ने के लिए छात्रवर्ती पर निर्भर है अब बाकि के 33 प्रतिशत छात...

मशहूर लेखकों द्वारा लिखी गयी कुछ शानदार SAD HINDI POEM

चित्र
SAD HINDI POEM for youths by great poets आज कल के  facebook और  whatsapp के जमाने में लोग अपनी feelings को status और caption के जरिये व्यतीत करते है , इसलिए आज कल के युवा लोग भारत के पुराने Great कवियों की रचनाओं को अपनी भावनाओं को दिखाने का जरिया बनाते है , हमने आपके के लिए कुछ ऐसी कविताएं (SAD POEM) संग्रह की है 1 ओ गगन के जगमगाते दीप! -  हरिवंश राय बच्चन जी दीन जीवन के दुलारे खो गये जो स्वप्न सारे, ला सकोगे क्या उन्हें फिर खोज हृदय समीप? ओ गगन के जगमगाते दीप! यदि न मेरे स्वप्न पाते, क्यों नहीं तुम खोज लाते वह घड़ी चिर शान्ति दे जो पहुँच प्राण समीप? ओ गगन के जगमगाते दीप! यदि न वह भी मिल रही है, है कठिन पाना-सही है, नींद को ही क्यों न लाते खींच पलक समीप? ओ गगन के जगमगाते दीप 2. मैंने गाकर दुख अपनाए! - हरिवंश राय बच्चन कभी न मेरे मन को भाया, जब दुख मेरे ऊपर आया, मेरा दुख अपने ऊपर ले कोई मुझे बचाए! मैंने गाकर दुख अपनाए! ...

एम्बुलेंस की मोहताज हो गयी आइंस्टीन को चुनौती देने वाले गणितज्ञ की देह ।

चित्र
एम्बुलेंस की मोहताज हो गयी आइंस्टीन को चुनौती देने वाले गणितज्ञ की देह       Pic source : the quint भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और आइंस्टीन के सिद्धान्तों को चुनौती देकर प्रसिद्ध हुए डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह जी का देहांत पटना के पीएमसीएच हुआ , वह 77 साल के थे और करीब 40 साल से सिजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित थे । उनकी प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने भी ट्वीट करके उनके निधन पर शोक जताया है  राष्ट्रपति जी का ट्वीट प्रधानमंत्री जी का ट्वीट अब आप इस चित्र को देखिये  इस चित्र में जिस व्यक्ति की देह स्ट्रेचर पर लेटी है डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह जी की है और बगल में जो सज्जन खड़े है वह इनके परिजन है और उनका कहना है कि अस्पताल की तरफ से उन्हें कोई एम्बुलेंस मुहैया नहीं करायी गयी और वह 2 घंटे खुले में वशिष्ठ जी की देह को लेकर एम्बुलेंस आने का इंतजार करते रहे और अंत में स्वयं की व्यवस्था करके शव को घर ले गए । अब...

आखिर क्यों है रविवार हमसे नाराज ?

चित्र
  रविवार आपसे कुछ कहना चाहता है ! Sunday wants to say something to you!           नमस्कार दोस्तों, मैं इतवार हूँ , आप लोग मुझे Sunday के नाम से भी जानते होंगे.. सन 1843 तक बाकि के 6 दिनों जैसा आम (फल वाला नहीं, केजरीवाल वाला) सा दिन था परंतु इसके बाद मेरी जिंदगी ही बदल गयी , अंग्रेजो ने कूटनीति से मुझे अवकाश घोषित करके मुझमे और मेरे बाकि के 6 भाइयों में फूट डाल दी , कुछ दिन हमारे झगडे चले पर अब सुलह हो गयी है क्योंकि अब हम इंसान थोड़ी है जो अंग्रेजो के गाड़े खूंटो के लिए  अभी तक लड़ते रहे, फिर क्या था मैं एका एक सबका चहेता बन गया... पहले जब मेरे आने से किसी को फर्क नहीं पड़ता था अब सब मेरा ही इंतजार करने लगे... मेरे आने से सबसे ज्यादा खुश बच्चे होते है, क्योंकि उन्हें न तो सुबह जल्दी उठ कर स्कूल जाना होता है और ऊपर से खेलने के लिए ढेर सारा वक्त मिल जाता है वह अलग ,कामकाजी पुरुष आराम से उठते है और फिर दिनभर ऐसे सुस्ताते रहते है जैसे उन्हें राहुल गाँधी जी जैसा जबरजस्ती संसद में बैठना पड़ रहा हो, प...

प्रदूषण सब ने फैलाया ,तो जिम्मेदार अकेला किसान क्यों ?

चित्र
                 कटघरे में किसान अकेला क्यों ?? मीडिया , सरकार, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली की आम जनता पड़ोसी राज्यो के किसानों पर पराली जलाने को लेकर कटघरे में खड़ा कर दिया है और दूसरे कारणों का कही से कही तक कोई जिक्र ही नहीं हो रहा है । तो क्या सच में इस प्रदुषण को लेकर किसान इतना जिम्मेदार है ? क्या सच में दिल्ली में फैले प्रदूषण को लेकर वहाँ की आम जनता , सरकार और पावर प्लांट बेकसूर है ? सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 35 प्रतिशत दिल्ली का प्रदूषण किसानों के द्वारा जलायी गयी पराली से होता है , अगर इस आंकड़े को एक पल के लिए सही भी मान ले तो बाकि के 65 प्रतिशत का क्या ? अगर सरकार यह बता सकती है कि किसानों ने कितना प्रदूषण फैलाया तो उसे बाकि के 65 प्रतिशत के गुनाहगारों के बारे में भी पता ही होगा , पराली जलाने वाले किसानों पर तो सरकार जुर्माना लगा रही है पर लाखों AC और करोड़ो वाहनों का सुख भोगने वाली दिल्ली की आम जनता का क्या.... ? आंकड़ो के मुताबिक दिल्ली में करीब 1 करोड़ के अधिक वाहन है और पिछले साल सिर्फ और ...