धुँआ धुँआ दिल्ली

अपने बचपन में पर्यावरण पर निबंध लिखते वक्त दुष्प्रभाव लिखते वक्त यह भी सोचा ही होगा की यह सब तोह कहने की बाते है इसका इत्ता प्रभाव थोड़ी न होने वाला है .....
पर अब धीरे धीरे वह दुष्प्रभाव ज़मी पर दिखने लगे है और खासकर देश की राजधानी दिल्ली में जहाँ हवा की गुणवत्ता दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है और दिल्ली में कई जगह AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) लेवल खतरे के स्तर से ऊपर जा चूका है , यह कई इलाको में 400 के आस पास तोह चाँदनी चौक में 600 के स्तर तक पहुँच चूका है |

सुप्रीम कोर्ट की EPCA कमिटी के चेयरमैन भूरे लाल ने कहा है कि " दिल्ली और एनसीआर में हवा की गुणवत्ता कल रात और बिगड़ गई और अब गंभीर स्तर पर है। हमें इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ आपातकाल के रूप में लेना होगा क्योंकि इससे सभी पर, विशेषकर हमारे बच्चों पर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा"

हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट करते हुए कहा है कि
राज्य सरकार द्वारा ने मोर्चा संभाल हुए पहले दिवाली के दौरान फटाको पर रोक लगा कर , फिर बच्चो को मास्क बाँट कर स्थिति पर नियंत्रण पाने की पूरी कोशिश की पर सारी कोशिशें न काफी पाकर और स्थिति नियंत्रण के बाहर पाकर पड़ोसी राज्य में जलती परली को भी राज्य सरकार द्वारा निशाना बनाया लिया...

विपक्ष सरकार को प्रदूषण पर निशाना बनाये हुए है,
सरकार बचाव में लगी है,
राजनितिक रोटियां सिक रही है ,
धुँआ तो इतना उठ रहा है कि पूछो ही मत..
बस आग कहाँ लगी है किसी को खबर नहीं है..
खैर दिल्ली धुँए में खो रही है और आपका शहर न खोये इसके लिए अपने वातावरण का ध्यान रखे प्रकृति के नियमो का पालन करे और इस मुद्दे पर आपके क्या विचार है कमेंट बॉक्स में साँझा करे ,
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जय हिंद ,
जय भारत🙏

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